सुभ–प्रभात
पञ्चांग
22 सितंबर–2026 , मंगलवार
ब्रह्मा का: द्वितीय परार्ध
कल्प: श्री श्वेतवाराहकल्प
मन्वंतर: वैवस्वतमन्वन्तर
कलियुग: अट्ठाईसवाँ कलियुग
कलि चरण: प्रथम चरणे
द्वीप: जम्बु द्वीप
खण्ड: भरत खण्ड
वर्ष: भारत वर्ष
क्षेत्र: मधुपुरी क्षेत्र
नगर: धौलपुर नगर
अवतार: बौद्धावतार
- अयन: दक्षिणायन
- विक्रम संवत् - 2083, सिद्धार्थी
- शक संवत् - 1948, परभाव
- पूर्णिमांत - भाद्रपद
- अमांत - भाद्रपद
- तिथि
- शुक्ल पक्ष एकादशी - Sep 21 08:01 PM – Sep 22 09:43 PM
- शुक्ल पक्ष द्वादशी - Sep 22 09:43 PM – Sep 23 10:50 PM
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा - Sep 21 04:34 AM – Sep 22 07:06 AM
- श्रवण - Sep 22 07:06 AM – Sep 23 09:09 AM
करण
वणिज - Sep 21 08:01 PM – Sep 22 08:56 AM
विष्टि - Sep 22 08:56 AM – Sep 22 09:43 PM
बव - Sep 22 09:43 PM – Sep 23 10:22 AM
योग
अतिगण्ड - Sep 21 04:05 PM – Sep 22 04:28 PM
सुकर्मा - Sep 22 04:28 PM – Sep 23 04:26 PM
वार
मंगलवार
त्यौहार और व्रत
पार्ष्व एकादशी
(परिवर्तिनी एकादशी) व्रत कथा
युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! भाद्रपद शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? इसकी विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए।
तब भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि इस पुण्य, स्वर्ग और मोक्ष को देने वाली तथा सब पापों का नाश करने वाली, उत्तम वामन एकादशी का माहात्म्य मैं तुमसे कहता हूं तुम ध्यानपूर्वक सुनो।
यह पद्मा/परिवर्तिनी एकादशी जयंती एकादशी भी कहलाती है। इसका यज्ञ करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पापियों के पाप नाश करने के लिए इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन मेरी (वामन रूप की) पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं। अत: मोक्ष की इच्छा करने वाले मनुष्य इस व्रत को अवश्य करें।
जो कमलनयन भगवान का कमल से पूजन करते हैं, वे अवश्य भगवान के समीप जाते हैं। जिसने भाद्रपद शुक्ल एकादशी को व्रत और पूजन किया, उसने ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों का पूजन किया। अत: हरिवासर अर्थात एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं।
भगवान के वचन सुनकर युधिष्ठिर बोले कि भगवान! मुझे अतिसंदेह हो रहा है कि आप किस प्रकार सोते और करवट लेते हैं तथा किस तरह राजा बलि को बांधा और वामन रूप रखकर क्या-क्या लीलाएं कीं? चातुर्मास के व्रत की क्या विधि है तथा आपके शयन करने पर मनुष्य का क्या कर्तव्य है। सो आप मुझसे विस्तार से बताइए।
श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे राजन! अब आप सब पापों को नष्ट करने वाली कथा का श्रवण करें। त्रेतायुग में बलि नामक एक दैत्य था। वह मेरा परम भक्त था। विविध प्रकार के वेद सूक्तों से मेरा पूजन किया करता था और नित्य ही ब्राह्मणों का पूजन तथा यज्ञ के आयोजन करता था, लेकिन इंद्र से द्वेष के कारण उसने इंद्रलोक तथा सभी देवताओं को जीत लिया।
इस कारण सभी देवता एकत्र होकर सोच-विचारकर भगवान के पास गए। बृहस्पति सहित इंद्रादिक देवता प्रभु के निकट जाकर और नतमस्तक होकर वेद मंत्रों द्वारा भगवान का पूजन और स्तुति करने लगे। अत: मैंने वामन रूप धारण करके पांचवां अवतार लिया और फिर अत्यंत तेजस्वी रूप से राजा बलि को जीत लिया।
इतनी वार्ता सुनकर राजा युधिष्ठिर बोले कि हे जनार्दन! आपने वामन रूप धारण करके उस महाबली दैत्य को किस प्रकार जीता?
श्रीकृष्ण कहने लगे- मैंने (वामन रूपधारी ब्रह्मचारी) बलि से तीन पग भूमि की याचना करते हुए कहा- ये मुझको तीन लोक के समान है और हे राजन यह तुमको अवश्य ही देनी होगी।
राजा बलि ने इसे तुच्छ याचना समझकर तीन पग भूमि का संकल्प मुझको दे दिया और मैंने अपने त्रिविक्रम रूप को बढ़ाकर यहां तक कि भूलोक में पद, भुवर्लोक में जंघा, स्वर्गलोक में कमर, मह:लोक में पेट, जनलोक में हृदय, यमलोक में कंठ की स्थापना कर सत्यलोक में मुख, उसके ऊपर मस्तक स्थापित किया।
मैंने अपना पैर उसके मस्तक पर रख दिया जिससे मेरा वह भक्त पाताल को चला गया। फिर उसकी विनती और नम्रता को देखकर मैंने कहा कि हे बलि! मैं सदैव तुम्हारे निकट ही रहूंगा। विरोचन पुत्र बलि से कहने पर भाद्रपद शुक्ल एकादशी के दिन बलि के आश्रम पर मेरी मूर्ति स्थापित हुई।
इसी प्रकार दूसरी क्षीरसागर में शेषनाग के पष्ठ पर हुई! हे राजन! इस एकादशी को भगवान शयन करते हुए करवट लेते हैं, इसलिए तीनों लोकों के स्वामी भगवान विष्णु का उस दिन पूजन करना चाहिए। इस दिन तांबा, चांदी, चावल और दही का दान करना उचित है। रात्रि को जागरण अवश्य करना चाहिए।
जो विधिपूर्वक इस एकादशी का व्रत करते हैं, वे सब पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में जाकर चंद्रमा के समान प्रकाशित होते हैं और यश पाते हैं। जो पापनाशक इस कथा को पढ़ते या सुनते हैं, उनको हजार अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
सूर्य और चंद्रमा का समय
सूर्योदय - 6:10 AM
सूर्यास्त - 6:11 PM
चन्द्रोदय - Sep 22 3:41 PM
चन्द्रास्त - Sep 23 2:42 AM
अशुभ काल
राहू - 3:11 PM – 4:41 PM
यम गण्ड - 9:11 AM – 10:41 AM
कुलिक - 12:11 PM – 1:41 PM
दुर्मुहूर्त - 08:35 AM – 09:23 AM, 10:59 PM – 11:47 PM
वर्ज्यम् - 11:26 AM – 01:10 PM
शुभ काल
अभिजीत मुहूर्त - 11:47 AM – 12:35 PM
अमृत काल - 10:00 PM – 11:44 PM
ब्रह्म मुहूर्त - 04:34 AM – 05:22 AM
आनन्दादि योग
पद्म Upto - 08:50 AM
लुम्ब
सूर्या राशि
सूर्य कन्या राशि पर है
चंद्र राशि
चन्द्रमा मकर राशि पर संचार करेगा (पूरा दिन-रात)
चन्द्र मास
अमांत - भाद्रपद
पूर्णिमांत - भाद्रपद
शक संवत (राष्ट्रीय कलैण्डर) - भाद्रपद 31, 1948
वैदिक ऋतु - वर्षा
द्रिक ऋतु - शरद
Auspicious Yogas
सर्वार्थसिद्धि योग - Sep 21 04:34 AM - Sep 21 06:10 AM (Uttara Ashadha and Sunday)
Chandrashtama
1. Mrigashirsha Last 2 padam, Ardra , Punarvasu First 3 padam


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