मंगलवार, 15 सितंबर 2026

ऋषि पञ्चमी (RISHI PANCHAMI)


चलें आज इसी बहाने  भारतीय काल गणना की चर्चा करलें—

सनातन ब्रह्मांड विज्ञान के अनुसार सनातनी समय गणना (Cosmic Time Calculation) का विवरण इस प्रकार है:    


हिन्दू समय-गणना चक्र (Sanatan Time Calculation)सनातनी ग्रंथों में समय को बेहद सूक्ष्म इकाई से लेकर महा-कल्पों तक मापा गया है। 
   मन्वंतर की गणना को समझने के लिए सबसे पहले चतुर्युग (महायुग) को समझना जरूरी है:

1. चार युगों की अवधि (चतुर्युग):

 मानव वर्ष (Human Years) के अनुसार चारों युगों का समय इस प्रकार है:
* सत्ययुग (कृतयुग): 17,28,000 वर्ष
* त्रेतायुग: 12,96,000 वर्ष
* द्वापरयुग: 8,64,000 वर्ष
* कलियुग: 4,32,000 वर्ष
    जब इन चारों युगों का एक चक्र पूरा होता है, तो उसे एक चतुर्युग (या महायुग) कहा जाता है।   
    चतुर्युग = 43,20,000 मानव वर्ष (43.2 लाख वर्ष)

2. मन्वंतर की गणना:

  एक मनु की आयु या एक मन्वंतर का काल 71 चतुर्युगों के बराबर होता है।
1 मन्वंतर = 71 चतुर्युग = 30,67,20,000 मानव वर्ष (लगभग 30.67 करोड़ वर्ष)  
हर मन्वंतर के संधि काल (संक्रमण काल) में एक सतयुग के बराबर (17,28,000 वर्ष) का समय प्रलय/विश्राम का होता है।

3. कल्प (ब्रह्मा जी का एक दिन):

कुल 14 मन्वंतर मिलकर एक 'कल्प' बनाते हैं। 
एक कल्प को ब्रह्मा जी का केवल 'एक दिन' माना जाता है और इतनी ही लंबी उनकी 'एक रात' होती है। 
( 1 कल्प = 14 मन्वंतर (संधिकाल जोड़कर) = 1,000 चतुर्युग = 4,32,00,00,000 मानव वर्ष (4.32 अरब वर्ष) 

 वर्तमान स्थिति क्या है?

हम इस समय ब्रह्मा जी के जीवन के 51वें वर्ष के पहले दिन (श्वेतवाराह कल्प) में हैं। इस कल्प के 7वें (वैवस्वत) मन्वंतर के 28वें चतुर्युग का कलियुग वर्तमान में चल रहा है। 
॥श्री हरि:॥

कोई टिप्पणी नहीं:

पञ्चांग 26 सितंबर–2026 , शनिवार

सुभ–प्रभात पञ्चांग 26 सितंबर–2026 , शनिवार   ब्रह्मा का: द्वितीय परार्ध कल्प: श्री श्वेतवाराहकल्प मन्वंतर: वैवस्वतमन्वन्तर  कलियुग: अट्ठाईसव...